27.25% की रिकॉर्ड एफिशिएंसी! Longi ने इस नई टेक्नोलॉजी से तोड़ दी सिलिकॉन वेफर की सबसे बड़ी कमजोरी

सोलर इंडस्ट्री में एक बार फिर बड़ा रिकॉर्ड बना है। चीन की दिग्गज कंपनी Longi ने 27.25% एफिशिएंसी वाली बैक-कॉन्टैक्ट सोलर सेल विकसित करके यह साबित कर दिया है कि सिलिकॉन टेक्नोलॉजी अभी भी अपनी सीमा से बहुत दूर है। इस उपलब्धि की खास बात यह है कि इसमें हाई-रेजिस्टिविटी सिलिकॉन वेफर का इस्तेमाल किया गया है, जिसे अब तक कमर्शियल प्रोडक्शन में जोखिम भरा माना जाता था। नई इन-सीटू एज पैसिवेशन तकनीक के जरिए कंपनी ने उस कमजोरी को दूर किया है, जो इन वेफर्स को बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करने से रोकती थी।

LONGi achieves 27 percent back-contact cell efficiency

हाई-रेजिस्टिविटी वेफर: ज्यादा क्षमता, लेकिन ज्यादा नाजुक

हाई-रेजिस्टिविटी और हल्के डोप्ड सिलिकॉन वेफर्स में रीकॉम्बिनेशन साइट्स कम होती हैं, जिससे इलेक्ट्रिकल परफॉर्मेंस बेहतर होती है और थ्योरी के अनुसार ज्यादा एफिशिएंसी हासिल की जा सकती है। लेकिन समस्या यह है कि ये वेफर्स मैकेनिकल रूप से ज्यादा नाजुक होते हैं और कटिंग, हैंडलिंग या मॉड्यूल असेंबली के दौरान आसानी से क्रैक हो सकते हैं। यही कारण है कि इंडस्ट्री में आज भी अधिकतर निर्माता Czochralski-ग्रोउन स्टैंडर्ड वेफर्स का उपयोग करते हैं, जो थोड़े कम एफिशिएंट जरूर होते हैं, लेकिन मजबूत और प्रोसेसिंग में आसान होते हैं।

Longi और चीन की Sun Yat-sen University के शोधकर्ताओं ने पाया कि हाई-रेजिस्टिविटी वेफर्स अधिकतम पावर पॉइंट पर हाई-लेवल इंजेक्शन रेजीम में जल्दी प्रवेश करते हैं। इस स्थिति में एज रीकॉम्बिनेशन का असर बहुत ज्यादा बढ़ जाता है और अगर किनारों पर सही पैसिवेशन न हो, तो वेफर की पूरी संभावित क्षमता खत्म हो सकती है। शोध के लीड ऑथर हाओ लिन के अनुसार, बिना प्रभावी एज पैसिवेशन के, वेफर के किनारे एक “ड्रेन” की तरह काम करते हैं और थ्योरी में मिलने वाला फायदा व्यवहार में नजर नहीं आता।

इन-सीटू एज पैसिवेशन से खुली असली ताकत

रिसर्च टीम ने 182 मिमी × 91 मिमी आकार की हाइब्रिड इंटरडिजिटेटेड बैक-कॉन्टैक्ट (HIBC) सोलर सेल तैयार की। मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस में वेट केमिकल क्लीनिंग, CVD, फॉस्फोरस डिफ्यूजन, ALD, लेजर पैटर्निंग, PVD और स्क्रीन प्रिंटिंग जैसे स्टेप्स शामिल थे। मुख्य अंतर सिर्फ इतना था कि हाई-रेजिस्टिविटी वेफर्स के किनारों पर सिलिकॉन नाइट्राइड की डिपॉजिशन को नियंत्रित किया गया और इन-सीटू एज पैसिवेशन को जोड़ा गया।

टेस्टिंग में पाया गया कि लो-रेजिस्टिविटी सेल्स में एज पैसिवेशन से एफिशिएंसी में 0.34% का एब्सोल्यूट सुधार हुआ और प्सूडो-फिल फैक्टर में 0.48% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। लेकिन असली कमाल हाई-रेजिस्टिविटी सेल्स में दिखा, जहां एफिशिएंसी में 0.64% और प्सूडो-फिल फैक्टर में 1.04% का सुधार हुआ। यह सुधार लो-रेजिस्टिविटी सेल्स की तुलना में लगभग दोगुना था। अंततः हाई-रेजिस्टिविटी वेफर्स ने न केवल अपनी खोई क्षमता वापस पाई, बल्कि बेहतर प्रदर्शन करते हुए 0.34% का अतिरिक्त लाभ भी हासिल किया।

इस शोध को “Solar Energy Materials and Solar Cells” जर्नल में प्रकाशित किया गया है, जो यह दर्शाता है कि इंडस्ट्री के लिए यह एक महत्वपूर्ण गाइडलाइन साबित हो सकता है। हालांकि विशेषज्ञों ने यह भी चेतावनी दी है कि हाई-रेजिस्टिविटी वेफर्स की संवेदनशीलता केवल किनारों तक सीमित नहीं है, बल्कि मैन्युफैक्चरिंग के दौरान लगने वाली हल्की खरोंच या लंबे समय में पैसिवेशन डिग्रेडेशन भी इनके प्रदर्शन को प्रभावित कर सकती है।

कुल मिलाकर, Longi की यह उपलब्धि यह संकेत देती है कि अगर मैकेनिकल कंट्रोल और मॉड्यूल स्टेबिलिटी पर सख्त ध्यान दिया जाए, तो सिलिकॉन सोलर टेक्नोलॉजी अभी और ऊंचाइयों को छू सकती है। 27.25% की यह रिकॉर्ड एफिशिएंसी आने वाले समय में कमर्शियल मॉड्यूल्स की पावर आउटपुट और सोलर बिजली की लागत, दोनों को नई दिशा दे सकती है।

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