आज के समय में हजारों लोग अपने घर पर ऑन-ग्रिड सोलर सिस्टम लगवा चुके हैं। दिन में बिजली बिल कम आता है, नेट मीटर से एक्सपोर्ट का फायदा मिलता है और सिस्टम भी किफायती होता है। लेकिन असली परेशानी तब शुरू होती है जब दिन के समय ग्रिड बिजली चली जाती है और आपका सोलर सिस्टम होते हुए भी घर की सारी लाइटें बंद हो जाती हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि क्या सोलर पावर को बिजली कटौती के दौरान भी इस्तेमाल किया जा सकता है? क्या पहले से लगे On-Grid सिस्टम को Hybrid सिस्टम में बदला जा सकता है? अच्छी खबर यह है कि हां, यह संभव है और वह भी कम खर्च में।

On-Grid सोलर सिस्टम बिजली जाने पर क्यों बंद हो जाता है?
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि ऑन-ग्रिड सिस्टम काम कैसे करता है। इस सिस्टम में सोलर पैनल से आने वाली डीसी पावर ऑन-ग्रिड इन्वर्टर में जाती है, जहां वह एसी में कन्वर्ट होकर घर के लोड और नेट मीटर से होकर ग्रिड में एक्सपोर्ट होती है। नेट मीटर बिजली के इंपोर्ट और एक्सपोर्ट दोनों का रिकॉर्ड रखता है।
ऑन-ग्रिड इन्वर्टर में एक जरूरी सेफ्टी फीचर होता है जिसे “एंटी-आइलैंडिंग प्रोटेक्शन” कहते हैं। जैसे ही ग्रिड सप्लाई बंद होती है, इन्वर्टर भी तुरंत आउटपुट बंद कर देता है। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि लाइनमैन की सुरक्षा बनी रहे और बैक-फीडिंग न हो।
यही वजह है कि दिन में तेज धूप होने के बावजूद, यदि ग्रिड बिजली नहीं है, तो आपका ऑन-ग्रिड सिस्टम घर को बिजली नहीं दे पाता। इस स्थिति में सिस्टम को हाइब्रिड या ऑफ-ग्रिड मोड में बदलना एक व्यावहारिक समाधान बन जाता है।
On-Grid को Hybrid में कन्वर्ट करने के लिए क्या-क्या जोड़ना होगा?
अगर आपके घर में पहले से ऑन-ग्रिड सिस्टम लगा है, तो आपको पूरा सिस्टम बदलने की जरूरत नहीं है। आप कुछ अतिरिक्त कंपोनेंट जोड़कर इसे हाइब्रिड जैसा काम करने लायक बना सकते हैं।
सबसे पहले आपको एक अच्छा नॉन-BIS हाई फ्रीक्वेंसी ऑफ-ग्रिड या हाइब्रिड टाइप इन्वर्टर लेना होगा। ऐसे इन्वर्टर 400–500V तक की पीवी ओपन सर्किट वोल्टेज सपोर्ट करते हैं, जिससे आप अपनी मौजूदा सोलर स्ट्रिंग को सीधे इसमें उपयोग कर सकते हैं। यह एक बड़ा फायदा है क्योंकि आपको पैनल वायरिंग बदलने की जरूरत नहीं पड़ती।
दूसरा जरूरी कंपोनेंट है बैटरी बैंक। आप बजट के अनुसार लेड-एसिड या लिथियम बैटरी चुन सकते हैं। 24V सिस्टम के लिए दो 12V बैटरियां और 48V सिस्टम के लिए चार 12V बैटरियां लगती हैं। यदि आप लिथियम बैटरी लेते हैं तो एक सिंगल 24V या 48V पैक भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
तीसरा और चौथा कंपोनेंट है दो अलग-अलग एमसीबी (MCB)। एक एमसीबी ऑन-ग्रिड इन्वर्टर की पीवी लाइन पर और दूसरी ऑफ-ग्रिड इन्वर्टर की पीवी लाइन पर लगाई जाती है। ध्यान रखना जरूरी है कि एक समय में केवल एक ही इन्वर्टर को सोलर इनपुट मिले। दोनों को एक साथ जोड़ने से एमपीपीटी कन्फ्यूजन और बैक-फीडिंग का खतरा रहता है।
इन चार चीजों को जोड़कर आप मैनुअली अपने ऑन-ग्रिड सिस्टम को हाइब्रिड की तरह उपयोग कर सकते हैं।
कितना आएगा खर्च? 24V और 48V सिस्टम की पूरी लागत समझें
अब सबसे अहम सवाल है कि इस कन्वर्जन में कितना खर्च आएगा। नीचे एक अनुमानित लागत दी गई है, जो बाजार की औसत कीमतों पर आधारित है।
| कंपोनेंट | अनुमानित कीमत (रुपये में) |
| 24V/48V नॉन-BIS इन्वर्टर | ₹24,000 – ₹36,000 |
| लेड-एसिड बैटरी (प्रति पीस) | ₹10,000 – ₹12,000 |
| 24V लिथियम बैटरी | ₹35,000 – ₹45,000 |
| 48V लिथियम बैटरी | ₹60,000 – ₹75,000 |
| MCB (प्रति पीस) | ₹500 – ₹600 |
| वायरिंग व एक्सेसरीज | ₹3,000 – ₹5,000 |
यदि आप 24V सिस्टम में दो लेड-एसिड बैटरियों के साथ सेटअप करते हैं, तो कुल खर्च लगभग ₹45,000 से ₹50,000 के बीच आ सकता है।
वहीं 48V सिस्टम में चार लेड-एसिड बैटरियों और बड़े इन्वर्टर के साथ खर्च ₹75,000 से ₹85,000 तक पहुंच सकता है।
यदि आप लिथियम बैटरी चुनते हैं तो शुरुआती लागत ज्यादा होगी, लेकिन लंबी लाइफ, कम मेंटेनेंस और बेहतर बैकअप का फायदा मिलेगा।
मैनुअल से ऑटोमेटिक: सिस्टम को और स्मार्ट कैसे बनाएं?
ऊपर बताया गया सेटअप मैनुअल है। जब ग्रिड बिजली जाएगी, तब आपको एमसीबी स्विच बदलकर सोलर पावर को ऑफ-ग्रिड इन्वर्टर की ओर मोड़ना होगा। जब ग्रिड वापस आए, तो फिर से स्विच बदलना पड़ेगा।
यदि आप इसे ऑटोमेट करना चाहते हैं, तो एक रिले और डीसी कांटेक्टर का उपयोग कर सकते हैं। यह बहुत जरूरी है कि डीसी सर्किट में केवल डीसी कांटेक्टर ही इस्तेमाल करें। एसी चेंजओवर स्विच या एसी कांटेक्टर को डीसी लाइन में लगाना सुरक्षित नहीं है। डीसी में करंट लगातार रहता है और आर्क खुद से खत्म नहीं होता, जिससे कांटेक्ट वेल्डिंग या आग लगने का खतरा हो सकता है।
एक सही तरीके से डिजाइन किया गया ऑटोमैटिक स्विचिंग सिस्टम ग्रिड उपलब्धता के अनुसार खुद ही सोलर इनपुट को ऑन-ग्रिड या ऑफ-ग्रिड इन्वर्टर में शिफ्ट कर सकता है। इससे आपका सिस्टम पूरी तरह स्मार्ट हाइब्रिड जैसा काम करेगा।
अंत में यह समझना जरूरी है कि यह सेटअप एक किफायती समाधान है, लेकिन इंस्टॉलेशन हमेशा किसी अनुभवी टेक्नीशियन से ही करवाना चाहिए। सही वायरिंग, अर्थिंग और प्रोटेक्शन डिवाइस का उपयोग आपकी सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है। यदि सही तरीके से किया जाए, तो आप दिन में सोलर पावर का पूरा उपयोग कर सकते हैं और बिजली कटौती के दौरान भी अपने घर को रोशन रख सकते हैं।
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