सोलर सिस्टम लगवाने का विचार आते ही सबसे पहला सवाल यही उठता है कि On-Grid, Off-Grid या Hybrid में से कौन सा सिस्टम चुना जाए, क्योंकि तीनों के नाम तो अक्सर सुनने को मिल जाते हैं लेकिन इनके बीच का असली फर्क बहुत कम लोग साफ़-साफ़ समझ पाते हैं। सही सिस्टम का चुनाव न सिर्फ आपकी बिजली की जरूरत पूरी करता है, बल्कि लंबे समय में हजारों रुपये की बचत भी करा सकता है। इसी वजह से यह जरूरी है कि सोलर लगवाने से पहले आप तीनों सिस्टम्स के काम करने के तरीके, फायदे-नुकसान और उनकी लागत को ठीक से समझ लें, ताकि बाद में पछताना न पड़े और आपका पैसा सही जगह लगे।

On-Grid Solar System क्या है और यह कैसे काम करता है
On-Grid सोलर सिस्टम सीधे सरकारी बिजली ग्रिड से जुड़ा होता है और यही इसकी सबसे बड़ी पहचान है। दिन के समय जब सोलर पैनल बिजली बनाते हैं तो वही बिजली सबसे पहले आपके घर या ऑफिस के लोड को चलाती है। अगर उस समय सोलर से बनी बिजली कम पड़ जाती है तो सिस्टम अपने आप ग्रिड से बिजली ले लेता है और आपको किसी तरह की परेशानी नहीं होती। वहीं अगर सोलर पैनल जरूरत से ज्यादा बिजली बना रहे हैं तो वह अतिरिक्त बिजली नेट मीटर के जरिए ग्रिड में चली जाती है और उसके बदले आपको यूनिट क्रेडिट मिलते हैं।
इसका सीधा फायदा यह होता है कि आपका बिजली बिल लगभग जीरो के बराबर आ जाता है और आपको सिर्फ फिक्स्ड चार्ज ही देने पड़ते हैं। On-Grid सिस्टम की एक बड़ी खासियत यह भी है कि इसमें बैटरी की जरूरत नहीं होती, जिससे शुरुआती लागत कम रहती है और सरकार की सब्सिडी का फायदा भी मिलता है। हालांकि इसकी सबसे बड़ी कमी यह है कि अगर बिजली चली गई, तो यह सिस्टम भी बंद हो जाता है क्योंकि इसमें बैकअप के लिए बैटरी नहीं होती है।
Off-Grid Solar System क्यों होता है सबसे आत्मनिर्भर
Off-Grid सोलर सिस्टम उन लोगों के लिए बनाया गया है जो पूरी तरह बिजली ग्रिड पर निर्भर नहीं रहना चाहते। यह सिस्टम ग्रिड से बिल्कुल भी कनेक्टेड नहीं होता और इसमें सोलर पैनल के साथ बैटरियां लगी होती हैं। दिन में सोलर पैनल से बनी बिजली पहले आपके घर का लोड चलाती है और जो बिजली बच जाती है, वह बैटरियों में स्टोर हो जाती है। रात के समय या जब धूप नहीं होती, तब यही स्टोर की गई बिजली आपके काम आती है।
इस तरह पूरा सिस्टम आत्मनिर्भर बन जाता है और बिजली हो या न हो, आपका काम चलता रहता है। Off-Grid सिस्टम दूर-दराज के इलाकों, गांवों, फार्महाउस या उन जगहों के लिए बहुत सही होता है जहां बिजली की उपलब्धता भरोसेमंद नहीं होती। हालांकि इसकी कीमत On-Grid सिस्टम के मुकाबले 60 से 70 प्रतिशत तक ज्यादा होती है क्योंकि इसमें महंगी बैटरियां लगती हैं और कुछ साल बाद उन्हें बदलने का खर्च भी आता है। इसके अलावा इस सिस्टम पर सरकारी सब्सिडी भी नहीं मिलती, जो इसकी एक बड़ी कमी मानी जाती है।
Hybrid Solar System में कैसे मिलता है दोनों का फायदा
Hybrid सोलर सिस्टम को On-Grid और Off-Grid का स्मार्ट कॉम्बिनेशन कहा जा सकता है। इसमें सिस्टम ग्रिड से भी जुड़ा होता है और साथ ही इसमें बैटरियां भी लगी होती हैं। दिन के समय सोलर से बनी बिजली से आपका लोड चलता है और अतिरिक्त बिजली या तो बैटरी में स्टोर हो जाती है या फिर ग्रिड में चली जाती है। जब सोलर पावर उपलब्ध नहीं होती, तब आप बैटरी से बिजली ले सकते हैं और अगर बैटरी भी कम पड़ जाए, तो ग्रिड हमेशा बैकअप के तौर पर मौजूद रहता है।
इस तरह बिजली कभी वेस्ट नहीं होती और हर स्थिति में पावर मिलती रहती है। Hybrid सिस्टम उन जगहों के लिए बहुत अच्छा विकल्प है जहां बिजली कटौती होती रहती है लेकिन लोग बिल भी कम करना चाहते हैं। इसकी लागत On-Grid सिस्टम से करीब 60 से 70 प्रतिशत ज्यादा होती है, लेकिन इसमें नेट मीटरिंग और कई राज्यों में सब्सिडी का फायदा भी मिल जाता है, जिससे कुल खर्च कुछ हद तक संतुलित हो जाता है।
किस सिस्टम में कितना खर्च और पैसा कहाँ बचेगा
सोलर सिस्टम का फाइनल खर्च आपकी लोकेशन, पैनल और इन्वर्टर के ब्रांड, बैटरी टाइप, माउंटिंग स्ट्रक्चर और डिस्कॉम चार्जेस पर निर्भर करता है, लेकिन फिर भी एक अनुमानित तुलना आपको सही फैसला लेने में मदद कर सकती है।
| Solar System | अनुमानित लागत (प्रति kW) | किसके लिए सही |
| On-Grid | ₹60,000 – ₹70,000 | शहरों में घर, ऑफिस, शोरूम |
| Off-Grid | On-Grid से 60–70% ज्यादा | गांव, फार्महाउस, दूरदराज इलाके |
| Hybrid | On-Grid से 60–70% ज्यादा | पावर कट वाले शहर, क्लीनिक, WFH |
अगर आप शहरी इलाके में रहते हैं और पावर कट बहुत कम होते हैं तो On-Grid सिस्टम सबसे सस्ता और फायदेमंद विकल्प है, क्योंकि इसमें कम लागत में बिजली बिल में बड़ी बचत होती है। अगर आप ऐसे इलाके में रहते हैं जहां बिजली आती-जाती रहती है या बिल्कुल नहीं है तो Off-Grid सिस्टम आपको पूरी आज़ादी देता है, भले ही इसकी कीमत ज्यादा हो। वहीं Hybrid सिस्टम उन लोगों के लिए सही है जो कम बिजली बिल के साथ-साथ पावर कट में भी बिना रुकावट काम करना चाहते हैं। सही सिस्टम चुनकर आप न सिर्फ पैसे बचा सकते हैं, बल्कि लंबे समय के लिए एक भरोसेमंद और टिकाऊ बिजली समाधान भी पा सकते हैं।
यह भी पढ़े – 👉 सुबह-शाम 4 घंटे पक्की बिजली! MP में ACME Solar का 220MW + BESS प्रोजेक्ट, जानिए क्यों है ये डील खास